हमारीवाणी

www.hamarivani.com

Labels

Popular Posts

Hello world!
29 Comments - 16 Aug 2009
Welcome to Blogger. This is your first post. Edit or delete it, then start blogging!...

More Link
An image in a post
6 Comments - 16 Jul 2009
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit. Quisque sed felis. Aliquam sit amet felis. Mauris semper, velit semper laoreet dictum, quam diam dictum urna, nec placerat elit nisl in quam. Etiam augue pede, molestie eget, rhoncus at, convallis ut, eros. Aliquam pharetra. Nulla in tellus eget odio sagittis blandit. Maecenas at nisl. Null...

More Link

Tuesday, January 25, 2011

चाहता हूँ प्‍यार से पाँव वो पखार दूँ

चाहता हूँ प्‍यार से पाँव वो पखार दूँ

कौन दिलासा देगा नन्‍हीं बेटी नन्‍हें बेटे को,
भोले बालक देख रहे हैं मौन चिता पर लेटे को
क्‍या देखें और क्‍या न देखें बालक खोए खोए से,
उठते नहीं जगाने से ये पापा सोए सोए से
चला गया बगिया का माली नन्‍हें पौधे छोड़कर...
...चाहता हूँ आज उनको प्‍यार का उपहार दूँ,
जी उठो तुम और मैं आरती उतार लूँ
 
कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है,
सैनिकों के रक्‍त से आबाद हिन्‍दुस्‍तान है
धन्‍य है मइया तुम्‍हारी भेंट में बलिदान में,
झुक गया है देश उसके दूध के सम्‍मान में
दे दिया है लाल जिसने पुत्रमोह छोड़कर...
...चाहता हूँ प्‍यार से पाँव वो पखार दूँ,
 
लाडले का शव उठा बूढ़ा चला शमशान को,
चार क्‍या सौ-सौ लगेंगे चाँद उसकी शान को
देश पर बेटा निछावर शव समर्पित आग को,
हम नमन करते हैं उनके देश से अनुराग को
स्‍वर्ग में पहले गया बेटा पिता को छोड़कर...
...इस पिता के पाँव छू आशीष लूँ और प्‍यार लूँ,
जी उठो तुम और मैं आरती उतार लूँ
 

6 comments:

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बहुत ही दिल को छु जाने वाली है आपकी रचना ....आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी आज के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
आज (28/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

Unknown said...

dhanyawaad ji...

संजय भास्‍कर said...

कोमल भावों से सजी ..
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

yahi to kavita hai.
man ahladit ho gaya.

कविता रावत said...

कोमल मनोभावनाओं का बहुत ही संवेदनशील चित्रण मन में एक गहरी उच्छ्वास छोड़ बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है...
आभार

Unknown said...

hey..aap sabka aaabhar..

@ बिना अनुमति प्रकाशन अवैध. 9871283999. Powered by Blogger.

blogger