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Thursday, July 31, 2014

फिर एक चिता जली है, झूठी शान के नाम...

झूठी शान के नाम...फिर से एक चिता जली है... फिर से एक जान की बली चढ़ी है... मामला मुजफ्फरनगर से है.. जहां झूठी शान की खातिर एक भाई ने अपनी ही बहन का कत्ल कर उसकी चिता घर की छत पे ही जला दी...महापाप की ये कहानी फुगाना थाना इलाके के लोई गांव की है... जहां एक नन्ही सी जान की बलि ले ली गई.. झूठी शान के नाम पे... भाई के इस कुकृत्य में घरवालों ने भी पूरा साथ दिया... और नतीजा देखिए.... चादर में लिपटी उस बच्ची की लाश पड़ी है.... और छत पर बच्ची की अधजली चिता...


प्रेम और सम्मान के नाम पर हुई ...इस बीभत्स हत्या की कहानी सिर्फ हम नहीं कह रहे... बल्कि ये कहानी बच्चे –बच्चे को पता चल गई है.. कि यहां प्रेम का नाम लेना भी अपराध है... जिसका अंजाम जिंदगी का खात्मा ही है... झूठी शान के लिए घर की बिटिया की हत्या की कहानी सुनिए.. खुद ग्राम प्रधान की जुबां से..इन्ही ग्राम प्रधान ने ही पुलिस को घटना की सूचना दी थी...
(बिटिया को मारने की खबर जैसे ही मुझे मिली.. वैसे ही मैंने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस के पहुंचते ही हत्यारा परिवार भाग खड़ा हुआ- मेहरबान, ग्राम प्रधान, लोई)

मासूम को किस बेरहमी से मारा गया है.. उसकी बानगी ये तस्वीरें बयां कर रही है... देखिए... इस कमरे में हर तरफ खून ही खून है... वही खून..जो कातिलों की नसों में भी दौड़ता है... इस हत्या के बाद से पूरा समाज हत्यारों को थू थू कर रहा है...

ग्राम प्रधान के सूचना देने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जैसे तैसे चिता पर पानी डाल कर बच्ची के बचे-खुचे शव को बचाया...और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया... जो अब कातिलों को उनके ठिकाने तक पहुंचाने के लिए एक हथियार का काम करेगी...

ये मामला उस पूरे समाज के मुंह पर करारा तमाचा है.. जो कहता है कि वो आधुनिक है.. ये मामला उस समाज के लिए कलंक की तरह है... जो बेटा-बेटी एक समान ने नारे लगाते नहीं थकता... अब सोचना हमें है... कि आखिर कबतक हम झूठी शान की खातिर अपने ही जिगर के टुकड़ों की बलि देते रहेंगे


श्रवण शुक्ल

Friday, July 25, 2014

क्या है C-SAT विवाद ? क्यों है गुस्सा...



नमस्कार…. मैं हूं श्रवण कुमार शुक्ल... 'जीवन एक संघर्ष' ब्लॉग पर आपका स्वागत है।..आज हम बात करेंगे UPSC परीक्षा को लेकर मचे बवाल पर...दिल्ली से लेकर इलाहाबाद... बनारस से लेकर भोपाल.... मुंबई से लेकर चेन्नई.. हैदराबाद से लेकर कोलकाता... हर जगह बवाल मचा हुआ है.. बवाल है,, यूपीएससी की परीक्षा सी-सैट को लेकर... हम इस पर आपकी राय भी लेंगे... और आपको बताएंगे भी... कि आखिर ये विवाद क्यों शुरु हुआ... औऱ इसकी जड़ क्या है...

Wednesday, March 26, 2014

कई कई चेहरे हैं यहां...

कई कई चेहरे हैं यहां
कई कई आत्माएं हैं 
लोगों की, जो करते थे दिखावा...
मेरे अपने होने का।

तिलिस्म टूटा
विद्रूप चेहरा नजर आया
उनका, जो बने हैं सफेदपोश
जिनके पास अघोषित ठेका है जमाने का।

जो उनकी नजर में है
यकीं मानिए...
उस वक्त नजर भी न मिला पाए
जब कठोरता से घूरा मैंने

फिर ये सोच छोड़ दिया
ठगने दो, स्वयम्भू बनने/सोचने दो
करारा पलटवार होगा 
फिर मौका भी न होगा सोचने का

Sunday, March 9, 2014

कितनी संवेदनाएं...

उसके मृत चेहरे को देखा
कितनी संवेदनाएं थी
मरी हुई
जो चेहरे पर तो थी
मगर न-उम्मीदी लिए हुए

क्या ये ही स्याह सच है?
मानवता के चेहरे का
जिसका उद्धार न हो सका
लाख कोशिशों के बाद भी अबतक

क्या ये ही मसरूफियत है
जिंदगानी के कच्चे चिट्ठे का?
जिसके लिए दम भरते रहे हम
लाखों करोड़ों वर्षों से?

अगर ये सच है
तो किस काम का?
हमारी इच्छाशक्ति में इतना भी दम नहीं?
जो पंख लगा दें ...किसी की उम्मीदों को?


(C) श्रवण शुक्ल

मां के आँचल में...

अब कही नहीं जाना चाहता
थक गया हूं दुनियादारी से
सीधे घर जा रहा हूं
आराम करूंगा
मां के आँचल में सर रखके
रास्ते में हूं
जल्द पहुंचूंगा मां के पास
मेरी जन्नत वहीँ है
कोई और चाहत नहीं
नहीं जाना कहीं और
मां बुला रही है मुझे
और उसका प्यार


(C)- श्रवण शुक्ल
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