श्रवण शुक्ल
दुनिया का सबसे बुरा इंसान हूं मैं...हां..खलनायक पसंद हैं मुझे.. हूं मैं बुरा आदमी.. हूं मैं हर्टलेस.. कोई और आरोप ? नहीं न ? ऐसा ही हूं मैं.....
आदत सी पड़ जानी है इसकी.. सबको..हां..मुझे भी आदत है। पसंद है मुझे मेरी ये जिंदगी। मान लिया.. हूं मैं हर्टलेस...
सच्ची कहता हूं, मैं एक गवार हूं..वो भी जाहिल वाला .....समझ कुछ नहीं आता.. बस.. यूं ही सच बोलना सीख लिया.. अपनी मां से.. आशिर्वाद है सिर्फ मां का। किसी और का चाहिए भी नहीं।
हां मां ने खलनायकी नहीं सिखाई..ये तो दुनिया से सीखा.। मां की नजर में आज भी वही लविंग बॉय हूं। प्यारा सा बच्चा...
और क्या कहूं... किसी से नफरत करने के लिए एक वजह काफी है... मैंने तो काफी सारे बता दिए.... नफरत करो सभी मुझसे... कोई फर्क नहीं पड़ता..
बस मां का प्यार चाहिए... दुनिया का प्यार दिखावटी है। मुझे नहीं पता कि मैं क्यों लिख रहा हूं.. शायद गुस्सा है किसी बात का... हां.। याद आया.. गुस्सा है खुदसे। लेकिन पता ही नहीं कि क्यों। एक वजह हो तो बताऊं..शायद ऐसा ही हूं मैं. एक बुरा इंसान। जो प्यार का नहीं..नफरतों का भूखा है। जिसे अपने इमेज की भी परवाह नहीं.. क्यों परवाह हो ? जब किसी से नफरत का कोई डर ही न हो।
![]() |
| श्रवण शुक्ल (नाम में रावण पसंद है मुझे। जिससे लोग नफरत करते हैं) |
दुनिया का सबसे बुरा इंसान हूं मैं...हां..खलनायक पसंद हैं मुझे.. हूं मैं बुरा आदमी.. हूं मैं हर्टलेस.. कोई और आरोप ? नहीं न ? ऐसा ही हूं मैं.....
आदत सी पड़ जानी है इसकी.. सबको..हां..मुझे भी आदत है। पसंद है मुझे मेरी ये जिंदगी। मान लिया.. हूं मैं हर्टलेस...
सच्ची कहता हूं, मैं एक गवार हूं..वो भी जाहिल वाला .....समझ कुछ नहीं आता.. बस.. यूं ही सच बोलना सीख लिया.. अपनी मां से.. आशिर्वाद है सिर्फ मां का। किसी और का चाहिए भी नहीं।
हां मां ने खलनायकी नहीं सिखाई..ये तो दुनिया से सीखा.। मां की नजर में आज भी वही लविंग बॉय हूं। प्यारा सा बच्चा...
और क्या कहूं... किसी से नफरत करने के लिए एक वजह काफी है... मैंने तो काफी सारे बता दिए.... नफरत करो सभी मुझसे... कोई फर्क नहीं पड़ता..
बस मां का प्यार चाहिए... दुनिया का प्यार दिखावटी है। मुझे नहीं पता कि मैं क्यों लिख रहा हूं.. शायद गुस्सा है किसी बात का... हां.। याद आया.. गुस्सा है खुदसे। लेकिन पता ही नहीं कि क्यों। एक वजह हो तो बताऊं..शायद ऐसा ही हूं मैं. एक बुरा इंसान। जो प्यार का नहीं..नफरतों का भूखा है। जिसे अपने इमेज की भी परवाह नहीं.. क्यों परवाह हो ? जब किसी से नफरत का कोई डर ही न हो।
