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Friday, October 3, 2014

लड़ाइयां ...Fights

श्रवण शुक्ल
बचपन में लड़ाइयां तो खेल का हिस्सा थी
स्कूल में गए तो सहपाठियों से लड़ाई
घर आये तो भाई से लड़ाई
पड़ोस में गए तो पडोसी से लड़ाई
गांव में गए तो गांववालों से लड़ाई
बाजार गए तो लड़ाई
मेले में गए तो लड़ाई
लेकिन उन लड़ाइयों में भी प्यार था
कभी भाई के लिए लड़ाई
तो कभी दोस्त के लिए लड़ाई
कभी मम्मी की कसम पे लड़ाई तो कभी गुरुजी को लेकर लड़ाई
कभी जिसे अपना मान लिया उसके लिए लड़ाई
तो कभी दुश्मन के लिए भी लड़ाई
कि कैसे मेरे दुश्मन को किसी और ने मार दिया।
वो भी क्या दिन थे..
जब मोहब्बत हर मोड़ पर हो जाया करती थी
और सच्ची दोस्ती भी
आज भी सब मिलते हैं
लेकिन अब वो प्यार कहाँ
दोस्तों में गर्मजोशी कहां
अब तो मोहब्बत भी अच्छे-बुरे का तोल- मोल करती है
इसीलिए सुन लो दुनियावालों
अकेले रहता हूँ.. इसी में खुश हूं..
पता है क्यों?
खुशियों से नफरत जो हो गई है
और बचपन की आदत है..दुश्मन को करीब रखने की
ऐसा ही हूँ मैं।

Monday, February 17, 2014

प्रेम पर क्या लिखूं...


श्रवण शुक्ल
प्रेम पर क्या लिखूं...
सबकुछ तो लिखा जा चुका है
गजलों, नज्मों, शेरों
के रुप में।

मैं तो जरा सा सिपाही हूं
जो प्रेमी भी है,
लड़ता भी है..
ये भी लिख चुके हैं सभी।

मगर दिल नहीं मानता
कहता है कि बोलो कुछ
अरे हद है यार
क्या दादा गिरी...।

कह तो रहे हो लिखने को
लेकिन तुम तो खाली हो
फक्कड़,
जिसमें सिर्फ वो बसी है..
कहो क्या लिखूं
उसका नाम ..?
या चाहतों का पैगाम?

कल भी कोशिस की थी
कि बात कर लूं..
बेहोशी की हालत में सही
लेकिन उस समय मंजर ही बदल गए।

हथियार डाल दिए तुम
और मैं बकबकाया...
फिर साबित हुआ असफल
जो था.. कह न पाया. हूूं औ रहूंगा..
लेकिन कोशिसें जारी रहेंगी
तुम्हें पाने की...

(प्यार से, प्यार को, प्यार के लिए....दिल भरा है, कुछ कहने की हिम्मत नहीं। फिर भी कह ही देता हूं टूटे शब्दों में दिल का हाल)
(C) श्रवण शुक्ल — feeling कोशिसें अभी जारी है तुम्हे पाने की।

Sunday, February 2, 2014

तुम्हारा प्यार

श्रवण शुक्ल
(दिल का मरीज)
तुम्हारा प्यार ही तो है, जीने की वजह
तुम्हारा प्यार ही तो है, लंबे इंतजार की वजह

तुम्हारा प्यार ही तो है, जो उम्मीदें देता है
जो प्यार जगाए हुए है औरों के लिए भी
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिनसे उम्मीदें थी
जिसके लिए हूं मैं, तुमसे दूर होकर भी

तुम्हारा प्यार ही तो है, मेरे समर्पण की वजह
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो जिंदा रखे हुए है सबकुछ
वर्ना जीने को था ही क्या ?
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो जा रहा है 
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो मेरा था, लेकिन किसी और की किस्मत में लिख गया
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिसके लिए अब भी जिंदा रहूंगा
...जैसे अबतक था
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिसके लिए आउंगा..
अगले जन्म भी
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो शायद अब भी मिले
आखिरी बार ही सही
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो सुल्तानपुर से शुरु..
और जाने कहां रुकेगा .. कारवां
शायद कभी नहीं
क्योंकि...कहने वालों ने कहा है..
लिखने वालों ने लिखा है..
प्यार कभी खत्म नहीं होता...
तो उम्मीदें भी खत्म नहीं होंगी...
क्योंकि जिंदगी में जो चाहिए..
वो है मेरे पास..
पूछो क्या... 
तुम्हारा प्यार।

तुम्हारा प्यार (C) copyright श्रवण शुक्ल



Monday, September 2, 2013

दास्तां

श्रवण शुक्ल
9871283999
तुम... तुम... और सिर्फ तुम
कुछ कहना नहीं
कुछ सुनना नहीं..
बस चाहत और तुम्हारी आहट
यही है .. हमारे दिल की दास्तां..

तुम जो कहो
तो तुम्हारे पास आ जाएं
आशिकी भी करें
आवारगी भी करें
और तुम्हारे हो जाएं
अब तुम भी कहो.. कुछ अपनी दास्तां

हम और कुछ कह नहीं सकते
कुछ और सुन नहीं सकते
सिवाय तुम्हारे इश्क के
हम अब रह नहीं सकते

और क्या कहें?
सबकुछ तो कह चुके नहीं..
आखिरी शब्द यही हैं..
जीना है, मरना है.. सिर्फ तुम्हारे साथ
लो खतम हो गयी हमारी दास्तां..!

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