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Sunday, February 2, 2014

तुम्हारा प्यार

श्रवण शुक्ल
(दिल का मरीज)
तुम्हारा प्यार ही तो है, जीने की वजह
तुम्हारा प्यार ही तो है, लंबे इंतजार की वजह

तुम्हारा प्यार ही तो है, जो उम्मीदें देता है
जो प्यार जगाए हुए है औरों के लिए भी
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिनसे उम्मीदें थी
जिसके लिए हूं मैं, तुमसे दूर होकर भी

तुम्हारा प्यार ही तो है, मेरे समर्पण की वजह
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो जिंदा रखे हुए है सबकुछ
वर्ना जीने को था ही क्या ?
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो जा रहा है 
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो मेरा था, लेकिन किसी और की किस्मत में लिख गया
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिसके लिए अब भी जिंदा रहूंगा
...जैसे अबतक था
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिसके लिए आउंगा..
अगले जन्म भी
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो शायद अब भी मिले
आखिरी बार ही सही
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो सुल्तानपुर से शुरु..
और जाने कहां रुकेगा .. कारवां
शायद कभी नहीं
क्योंकि...कहने वालों ने कहा है..
लिखने वालों ने लिखा है..
प्यार कभी खत्म नहीं होता...
तो उम्मीदें भी खत्म नहीं होंगी...
क्योंकि जिंदगी में जो चाहिए..
वो है मेरे पास..
पूछो क्या... 
तुम्हारा प्यार।

तुम्हारा प्यार (C) copyright श्रवण शुक्ल



Sunday, January 12, 2014

नाराज नहीं किसी से






श्रवण शुक्ल

दर्द में भी मुस्कराए, लेकिन कोई समझ न पाए.. 
सारे गमों को छिपाए, लेकिन कुछ न सुनाए..
हर शाम जिए, बिना उफ किए..
चलती ही जाए, सबकुछ भुलाए..

हर दिन निकले, बिना कुछ कहे..
कुछ शायरी, कुछ नगमा गुन-गुनाए..
हालातों की कुछ शिकायत भी नहीं..
बस मुस्कराए, खामोशी से चलती जाए..

जो खुशियां मिली, उन्हें खुद में समेटती जाए..
खामोश सफर में अकेली, मगर नाराज नहीं किसी से
मेरी जिंदगी...
ऐ जिंदगी...ऐ जिंदगी... ऐ जिंदगी....

Monday, September 2, 2013

दास्तां

श्रवण शुक्ल
9871283999
तुम... तुम... और सिर्फ तुम
कुछ कहना नहीं
कुछ सुनना नहीं..
बस चाहत और तुम्हारी आहट
यही है .. हमारे दिल की दास्तां..

तुम जो कहो
तो तुम्हारे पास आ जाएं
आशिकी भी करें
आवारगी भी करें
और तुम्हारे हो जाएं
अब तुम भी कहो.. कुछ अपनी दास्तां

हम और कुछ कह नहीं सकते
कुछ और सुन नहीं सकते
सिवाय तुम्हारे इश्क के
हम अब रह नहीं सकते

और क्या कहें?
सबकुछ तो कह चुके नहीं..
आखिरी शब्द यही हैं..
जीना है, मरना है.. सिर्फ तुम्हारे साथ
लो खतम हो गयी हमारी दास्तां..!

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