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Thursday, August 18, 2011

अन्ना जी के तिहाड जेल में रहते हुए जनता को दिए गए सन्देश : रिकार्डिंग किरण वेदी जी

अन्ना जी के तिहाड जेल में रहते हुए जनता को दिए गए सन्देश : रिकार्डिंग किरण वेदी जी


हेडलाइन पर क्लिक करके वीडिओ पर जाएँ


अपने लोकपाल बिल की खूबियों के लिए यहां क्लिक (हिंदी) करें

Here is the PDF version of the presentation on diff between Jan LokPal & Govt. Lokpa(ENGLISH)l



Anna Hazare video from Tihar compound recorded by Dr. Kiran Bedi



Anna Hazare's 1st message from Tihar Compound - complete video



Anna Hazare's message from Tihar prison compound- part 2


आगे के अन्य वीडियो को भी यथासंभव उपलब्ध कराया जाएगा.....जय हिंद


Wednesday, August 17, 2011

जेपी से अन्ना आन्दोलन : भ्रस्टाचार के खात्मे की तरफ एक कदम और.......

यहां की सरकार एकदम निकम्मी है ... लोकपाल बिल पर इतना हंगामा हो रहा है, बातचीत टूट चुकी है. 16 अगस्त से अन्ना हजारे फिर से आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं .. यहां आज़ादी की दूसरी लड़ाई अब शुरू हो चुकी है जो भ्रष्टाचार को लेकर है, अन्ना ने जेल जाने से पहले पूरे भारत में सन्देश प्रसारित करवा दिया, लोग सबकुछ छोड़कर उनके साथ आ रहे हैं. उनके हिरासत में होने के कुछ ही देर में उनके क्रांति का नारा लिए वीडियो पूरी दुनिया में छा चुका है सम्पूर्ण विश्व में विरोध-प्रदर्शन शुरु हो चुके हैं, जय-प्रकाश नारायण(जेपी) जो काम अधूरा छोड़ गए थे ... लगभग उसी उम्र में अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार खत्म करने का बीड़ा उठाया है .. जेपी ने सम्पूर्ण क्रांति का नारा दिया था.. जिसमे बच्चे-बड़े , बूढ़े सभी लोगो ने साथ दिया था जिसका नतीजा यह निकला कि देश में आपातकाल लागू हो गया . जिसकी वजह से इंदिरा-गाँधी और कांग्रेस को अपना सबकुछ खोना पद, जेपी के अस्वस्थ होने की वजह से वह आन्दोलन अधूरा रह गया जिसका फायदा उनके कुछ राजनीतिक चेलो ने उठाया.. भ्रष्टाचार खत्म होने की जगह उनके शिष्यों के भ्रष्टाचार की नई उचाईयों को छुआ, उनके राजनीतिक शिष्यों ने देश भ्रस्ताचार जी नई परिभाषा गढ़ी...लेकिन अन्ना के साथ जो फ़ौज कड़ी है वो राजनैतिक नहीं बल्कि सामाजिक है.. यहां अरविंद केजरीवाल, किरण वेदी, प्रशांत भूषण जैसे पूर्ण समर्पित योद्धा हैं जो एक मजबूत लोकपाल को लाने के लिए हमारे बीच हैं.

पिछली बार आपसी फूट से आन्दोलन सफल होकर भी विफल हो गया. लेकिन इस बार ऐसा होने के आसार नहीं नजर आते. यहां एक अन्ना लड़ाई में नहीं . यहां पूरा देश आज अन्ना-मय हो गया है. आंकड़े भी बताते हैं कि देश में जागरूकता आई है ..

जेपी आन्दोलन में सत्ता परिवर्तन लक्ष्य था क्योकि महंगाई से त्रस्त जनता बदलाव की मांग कर रही थी इस बार ऐसे लोकपाल के लिए जंग है जो तमान भ्रस्ताचार को जद से खतम कर दे... जिसके अंदर सभी चीजें आ सके. ताकि भ्रस्ताचार पर मजबूती से रोक लगाया जा सके..

अन्ना जी ने विश्व स्तर पर अपनी आवाज़ बुलन्द करते हुए कहा है कि विश्व के संकट को मद्देनज़र रखते हुए भारत को भ्रस्टाचार मुझे आज़ादी प्राप्त होना अति आवश्यक है। जब तक हम भ्रस्टाचार मुक्त न होंगे, हमारा स्वतंत्र अस्तित्व क़ायम न होगा और हम विकास के पथ पर अग्रसर न हो सकेंगे।


दिनकर जी ने लोकनायक जेपी के विषय में लिखा है–

है जय प्रकाश वह नाम
जिसे इतिहास आदर देता है।
बढ़कर जिसके पद चिन्हों की
उन पर अंकित कर देता है।
कहते हैं जो यह प्रकाश को,
नहीं मरण से जो डरता है।
ज्वाला को बुझते देख
कुंड में कूद स्वयं जो पड़ता है।।

अन्ना जी से प्रेरित हो मेरे परम मित्र अम्बिकाप्रसाद दुबे जी ने लिखा है जो युवाओ के लिए है :

हमने भी अब ये ठाना है
देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है
हमने आगे बढाएं है कदम
हम अब पीछे नहीं हटाएंगे
हम देश के युवा ये कसम खाते हैं
हम एक अच्छा भारत बनाएंगे

हम जियेंगे शान से
हमारे सपनों के सच्चे भारत मे
नहीं तो इन्कलाब के तूफ़ान मे
खुद को कुर्बान करते हुए मिट जायेंगे
पर ये तय है हम अब 
एक अच्छा भारत बनाएंगे 


भारत के लोकतंत्र का जब कत्ल हो रहा था तब पुराने स्वतंत्रता सेनानी जय प्रकाश नारायण ने एक बार फिर से आजदी बरकरार रखने के लिए युवाओ को साथ लेकर नवनिर्माण आन्दोलन शुरू किया । उस समय एक तानाशाह इंदिरा गाँधी जो मीसा को हथियार बना कर जुल्म कर रही थी उनके खिलाफ एक बुडी आवाज़ ने सारे हिंदुस्तान में जोश भर दिया । आज वही हाल इस कांग्रेस सरकार का है. सरकार ने धारा १४४ के साथ निषेधाज्ञा लागू करने के साथ ही अन्ना हजारे जी को गिरफ्तार करके ले गई.

इंदिरा इज इंडिया ,इंडिया इज इंदिरा कहने वाले भी उस लोक नायक की एक ऐसी क्रांति की उम्मीद नहीं कर रहे थे । मनमोहन सिंह की यह सरकार सोनिया के कदमो को चूमते हुए चल रही है इसीलिए आज का नया बन गया है

इंडिया अगेंस्ट करप्सन V/S कांग्रेस विथ करप्सन

लोकनायक ने एक नयी आज़ादी की लडाई लड़ी,और जीती, लोकनायक के चेलो ने उन्हें जिन्दा पर ही भुला दिया । और उनके जिन्दा रहते हुए संसद में शोक सन्देश प्रसारित कर दिया । और आज लोक नायक के द्वारा निर्मित नेता केंद्र सरकार में मंत्री है ,राज्य के मुख्य मंत्री है फिर भी वह उन्हें याद नहीं करते और जनता उसकी तो यादाश्त बहुत कमजोर होती है , गाँधी के बाद जय प्रकाश नारायण ने ही भारत को बचाया । और आज वही करने के अन्ना हजारे जी हम सबके साथ हैं..

क्रान्ति का आह्वान

जेपी ने सम्पूर्ण क्रांति का नारा दिया था और अन्ना जी ने जेल जाने से पहले हुए अपने वीडियो सूट में कहा है कि हमारा आन्दोलन कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा.. आप सब अपने कार्यालयों से छुट्टियाँ लेकर आन्दोलन में आये. आपका नेतृत्व करके के लिए योग्य लोग हैं.. मै जेल में रहकर अनशन करूँगा.

आगे के अपडेट्स आते रहेंगे बाकी कमेंट्स के माध्यम से

Tuesday, July 26, 2011

वन्दे मातरम्

वन्दे मातरम्


सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्

शस्यशामलां मातरम् ।

शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं

फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं

विजय दिवस पर यह गीत एक-बार फिर से देश को समर्पित - जय हिंद
...सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं

सुखदां वरदां मातरम् ।। १ ।। वन्दे मातरम् ।

कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-करा​ले

कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,

अबला केन मा एत बले ।

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं

रिपुदलवारिणीं मातरम् ।। २ ।। वन्दे मातरम् ।

तुमि विद्या, तुमि धर्म

तुमि हृदि, तुमि मर्म

त्वं हि प्राणा: शरीरे

बाहुते तुमि मा शक्ति,

हृदये तुमि मा भक्ति,

तोमारई प्रतिमा गडि

मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ।। ३ ।। वन्दे मातरम् ।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदलविहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्

नमामि कमलां अमलां अतुलां

सुजलां सुफलां मातरम् ।। ४ ।। वन्दे मातरम् ।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां

धरणीं भरणीं मातरम् ।। ५ ।। वन्दे मातरम् ।।
 
 
Translation by Sri Aurobindo


Mother, I bow to thee!

Rich with thy hurrying streams,

bright with orchard gleams,

Cool with thy winds of delight,

...Dark fields waving Mother of might,

Mother free.



Glory of moonlight dreams,

Over thy branches and lordly streams,

Clad in thy blossoming trees,

Mother, giver of ease

Laughing low and sweet!

Mother I kiss thy feet,

Speaker sweet and low!

Mother, to thee I bow.



Who hath said thou art weak in thy lands

When the sword flesh out in the seventy million hands

And seventy million voices roar

Thy dreadful name from shore to shore?

With many strengths who art mighty and stored,

To thee I call Mother and Lord!

Though who savest, arise and save!

To her I cry who ever her foeman drove

Back from plain and Sea

And shook herself free.



Thou art wisdom, thou art law,

Thou art heart, our soul, our breath

Though art love divine, the awe

In our hearts that conquers death.

Thine the strength that nervs the arm,

Thine the beauty, thine the charm.

Every image made divine

In our temples is but thine.



Thou art Durga, Lady and Queen,

With her hands that strike and her

swords of sheen,

Thou art Lakshmi lotus-throned,

And the Muse a hundred-toned,

Pure and perfect without peer,

Mother lend thine ear,

Rich with thy hurrying streams,

Bright with thy orchard gleems,

Dark of hue O candid-fair



In thy soul, with jewelled hair

And thy glorious smile divine,

Lovilest of all earthly lands,

Showering wealth from well-stored hands!

Mother, mother mine!

Mother sweet, I bow to thee,

Mother great and free!

Sunday, July 24, 2011

सालों से बेटों की तलास में दर-दर भटक रही है दलित सोमवती

  1. एक ही वर्ष में रहस्यमय तरीके से गायब हो गये थे तीन बच्चे
  2. पुलिस ने पाँच वर्ष तक नहीं की रिपोर्ट दर्ज, बाल अधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस के अथक प्रयासों से पाँच वर्ष बाद दर्ज हो सकी रिपोर्ट।
  3. बच्चों के गम में पिता ने पहले तो मानसिक संतुलन खोया आठ साल बाद कुत्ते के काटने से हो गई, बच्चों के गम में डूबे पिता ने इलाज भी कराना मुनासिव नहीं समझा।
  4. समय से पहले ही बूढ़ी हो चुकी सोमवती घरों में झाड़ू-पोछा करके बमुश्किल चला रही है घर
  5. थाना पुलिस से लेकर राष्ट्रपति तक लगाई जा चुकी है गुहार, सभी की ओर से मिलता है एक ही ‘‘जबाब तलास जारी है‘‘।

 

 आगरा के थाना जगदीशपुरा के बौद्ध नगर, घड़ी भदौरिया की तंग गलियों में रहती है अभागी सोमवती। एक छोटे से कमरे में अपने तीन बच्चों के साथ रहती है दलित सोमवती। 

नौ साल से दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठी एक मां को हर आहट पर यही लगता है कि शायद वो आया, लेकिन न तो वो आता है और ना ही उसकी आहट राहत देती है। वह हर सुबह इसी आस में जगती है और हर रात इसी उम्मीद में सोने की कोशिश करती है कि उसके ‘‘लाल‘‘ उससे मिलने आयेगें। वह पल पल जीती है और पल पल मरती है, मां के कलेजे को उनकी यादें सताती हैं और उसे रूला जाती हैं। 

यह उस मां की सदाये हैं जो हद वक्त अपने ही लाडलों को पुकार रही है। बरसों बीत जाने के बाद भी मां बड़े जतन से अपने कलेजे के टुकड़ों के लौटने का इंतजार कर रही है। बेटों के इंतजार में आंखों में रात गुजरती है और आंशुओं में दिन। न इंतजार खत्म हो रहा है और न कलेजे को ठंडक पहुच रही है, न कोई खबर मिल रही है और न कोई सुध मिल रही है। बच्चों के गम में पहले तो पिता ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया।

वर्षों तक गुमसुम रहा बच्चों की याद में हर समय उस घड़ी को कोसता रहता जिस घड़ी ने उसके मासूमों को उससे जुदा किया था। आठ साल तक एकदम गुमसुम सा रहने वाले पिता को जिंदगी बोझ लगने लगी थी। एकदिन कुत्ते ने उस पिता को काट लिया तो उसने अपना इलाज तक कराना मुनासिव नहीं समझा। वह बच्चों के गम में पूरी तरह से टूट चुका था। उसने अपने कुत्ते की घटना के बारे में अपनी पत्नी को भी नहीं बताया। जब वह पानी से डरने लगा तो सोमवती को कुछ शक हुआ तो कई बार पूछने पर उसने बताया कि उसे कुत्ते ने काट लिया है और अपना इलाज न कराने को कहा वह बच्चों के गम में और अधिक जीना नहीं चाहता था। सोमवती रोती हुई अपने पति के इलाज के लिए दौड़ी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। और उसके पति ने बच्चों के गम में दम तोड़ दिया। अब अभागी सोमवती अकेली है वह अब किसी के साथ दुख बांट भी नहीं सकती है।

पथराई आंखे, पपड़ाये होठ, वक्त से पहले ही चेहरे पर झुर्रियों की मार कुछ ऐसी ही है सोमवती। सोमवती हमेशा से ही ऐसी नहीं थी। सोमवती की भी दुनिया कभी खुशियों से भरी थी। सोमवती के लिए मई 2002 दुर्भाग्य लेकर आया। को सोमवती ने अपने बड़े बेटे आनन्द को अपने पिता को बुलाने के लिए सड़क पर चाय की दुकान से बुलाने के लिए भेजा था। वह पिता को तो आने की कह आया लेकिन खुद नहीं लौटा। अपने 14 वर्षीय बेटा जब शाम छः बजे तक भी नहीं लौटा तो उसकी तलास शुरू कर दी। आस-पास तथा रिश्तेदारों के यहाँ तलाश करने पर भी नहीं मिला तो सोमवती अपने बेटें की रिपोर्ट लिखाने थाने पहुची तो पुलिस का वो क्रूर चेहरा सोमवती के सामने आया जिसे याद करके वह आज भी सिहर उठती है। 

पुलिस ने बच्चे की रिपोर्ट लिखने से साफ मना कर दिया। कहा गया कि श्रीजी इंटरनेशनल फैक्ट्री में आग लग गई हमें वहां जाना है ऐसे बच्चो तो खोते ही रहते हैं। उसे रिपोर्ट दर्ज किये बिना ही भगा दिया गया। कहीं भी सुनवाई न होने पर सोमवती थक हारकर घर बैठ गई।

2002 की दीपावली से करीब पाँच-छः दिन पहले सोमवती का 12 साल का दूसरा बेटा रवि भी अचानक गायब हो गया। रवि घर के बाहर खेलने के लिए निकला था। रवि को तलाशने में खूब भागदौड़ की लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इस बार भी सोमवती थाने में गुहार लगाने पहुची मगर नतीजा पहले की तरह से शून्य ही रहा। अभी सोमवती के उपर दुखों का पहाड़ टूटना बाकी था। करीब तीन माह बाद सोमवती का तीसरा पुत्र रवि रहस्मय तरीके से गायब हो गया।

तीसरे बच्चे के गायब होने पर भी पहले की तरह सोमवती जगदीशपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराने गई तो इस बार तो पुलिस ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं। पुलिसकर्मियों ने लताड़ दिया और सोमवती से कहा कि तेरे बहुत बच्चे हैं। हर बार तेरे ही बच्चे गायब होते हैं। हमने क्या तेरे बच्चों का ठेका ले रखा है। क्यों इतने बच्चे पैदा किये ज्यादा बच्चे होंगे तो गायब होगें ही हम पर क्या तेरे बच्चे ढूढने का एक ही काम है जाओ और हमें भी काम करने दो।

तीन-तीन बच्चों के गम ने सोमवती तथा उसके पति गुरूदेव को झकझोर कर रख दिया। गुरूदेव बच्चों के गम में अपना मानसिक संतुलन खो बैठा दिन-रात सिर्फ बच्चों की याद में गुमसुम बैठा रहता। अब सारी जिम्मेदारी सोमवती पर आ गई थी। लेकिन सोमवती ने हार नहीं मानी और एक नियम बना लिया वह हर माह थाना जगदीशपुरा जाती और बच्चों के बारे में पूछती पुलिस द्वारा उसे हर बार भगा दिया जाता था लेकिन उसने थाने जाने का नियम नहीं तोड़ा।

10 फरवरी 2007 को सोमवती हर बार की तरह ही थाने गई थी पुलिस ने उसे हमेशा की तरह फटकार दिया था। सोमवती थाना जगदीशपुरा के बाहर बैठी रो रही थी तभी अचानक वहाँ से मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस गुजर रहे थे। उन्होने सोमवती से रोने का कारण पूछा तो पहले तो उसने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। लेकिन अधिक अनुरोध करने पर सोमवती ने नरेश पारस को रोते रोत पूरी घटना बताई। नरेश पारस ने थाना जगदीशपुरा में संपर्क किया तो पता चला कि सोमवती की रिपोर्ट दर्ज की ही नहीं गई थी। नरेश पारस ने सोमवती के मामले को स्थानीय मीडिया में उठाया तो मीडिया ने सोमवती की खबर को प्रकाशित किया। 

नरेश पारस ने सोमवती के दुख को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बताया तो मानवाधिकार आयोग ने तत्कालीन एसएसपी श्री जी के गोस्वामी को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की। आयोग के निर्देश एवं मीडिया की पहल पर सीओ लोहामण्डी सुनील कुमार सिंह तथा एसओ विनाद कुमार पायल ने सोमवती के घर जाकर हालचाल जाना तथा सोमवती की रिपोर्ट दर्ज की। सोमवती के गायब हुए तीनो बेटों की गुमसुदगी पाँच वर्ष बाद 14 फरवरी 2007 को दर्ज हो सकी।

नरेश पारस लगातार सोमवती के संपर्क रहे। सोमवती के बच्चों के फोटों लेकर पुलिस ने पैम्पलेट छपवाएं। जिले में गुमसुदा प्रकोष्ठ भी खोले गये। गुमसुदा प्रकोष्ठ में भी कई बार सोमवती गई लेकिन उसे सख्त हिदायत दी जाती कि गुमसुदा प्रकोष्ठ में वही कहना है जो दरोगा जी बतायें। कहा जाता रहा कि तलास जारी है। पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नही की गई। जबकि सोमवती ने अपने स्तर से एक बेटें को ढूढ निकाला।

सोमवती ने बताया कि उसका बड़ा बेटा आनन्द कुबेरपुर गांव में एक जाट परिवार में रहता है। सोमवती का कहना है कि जब वह अपने बेटे से मिलने गई तो जाट परिवार की महिला ने कहा कि वह आनन्द को फरीदाबाद रेलवे स्टेशन से लेकर आई थी । वह अब बच्चे को नहीं देगी। उसने बच्चे को दिल्ली के पास किसी जगह पर छुपा दिया। सोमवती ने कहा कि बच्चे को भले ही न दो लेकिन इतनी अनुमति दे दो कि वह अपने बेटे से त्याहारों पर मिल सके लेकिन उस महिला ने स्पष्ट इंकार कर दिया। और सोमवती को दुवारा नआने की हिदायत दी। सोमवती ने पुलिस से संपर्क किया तो पुलिस ने गाड़ी करने के लिए सोमवती से पैसों की मांग की। सोमवती की मदद के लिए पुलिस द्वारा कोई संतोषजनक कार्यवाही नहीं की। तंग आकर पुलिस ने अप्रेल 2010 में सोमवती के गुमसुदा बच्चों की फाइल ही बन्द कर दी।

सोमवती की फाइल बन्द होने की सूचना जैसे ही नरेश पारस को हुई तो नरेश पारस ने दुबारा से पुनः प्रयास किया। उन्होने सोमवती की मुलाकात तत्कालीन कमिश्नर श्रीमती राधा एस चौहान से मुलाकात कराई। श्रीमती चौहान ने नरेश पारस के अनुरोध पर सोमवती के गुमसुदा बच्चों की दुबारा फाईल खुलवाई। कमिश्नर ने सीओ लोहामण्डी सिद्धार्थ वर्मा को जाच सौपी और सोमवती के बेटों को ढूढने के निर्देश दिये।

नरेश पारस ने सोमवती का मामला महामहिम राष्ट्रपति को भी भेजा। राष्ट्रपति भवन से भी उ0 प्र0 सरकार के लिए निर्देश जारी हुए। उ0 प्र0 सरकार ने पुलिस को कार्यवाही के लिए निर्देश दिये। मामला फिर थान पुलिस पर आकर अटक गया। सोमवती आज भी अपने पुत्रों का इंतजार कर रही है। विगत मार्च माह में सोमवती के पति को कुत्ते ने काट लिया था। सोमवती का पति पहले ही बच्चों के गम में अपना मानसिक संतुलन खो चुका था वह बच्चों के गम में और अधिक जीना नहीं चाहता था इसलिए उसने अपने कुत्ते काटने के संबंध में किसी को भी नहीं बताया। यहाँ तक कि सोमवती का भी नहीं बताया। कुछ दिन गुजरने के बाद जब सोमवती का पति गुरूदेव पानी से डरने लगा तो सोमवती के कुछ शंका हुई और उसने अपने पति से पूछा तो गुरूदेव ने सोमवती को सबकुछ सच सच बता दिया और कहा कि वह अब और अधिक बच्चों का गम बर्दास्त नहीं कर सकता है इसलिए उसका इलाज भी न कराया जाए। सोमवती पति की बातों को सुनकर हैरान रह गई। वह आनन-फानन में पति को लेकर इलाज के लिए दौड़ी उसने कई जगह दिखाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक दिन बाद ही गुरूदेव ने दम तोड़ दिया। अब सोमवती बिल्कुल अकेली पड़ गई उसका आखिरी सहारा भी छिन गया था। अब वह दिन रात रोती रहती है। उसे अब उजाले से भी डर लगने लगा है। वह एक कमरे में अंधेरा करके बैठी रोती रहती है और अपने भाग्य को कोसती रहती है। अब उसके पास तीन बच्चे हैं 15 साल का संतोष, 12 साल की काजल तथा 10 साल का उमेश। पढ़ने लिखने की उम्र में सोमवती ने अपने दोनों बेटों को जूते का काम सिखाने के लिए पास के ही एक कारखाने में भेज दिया। अब सोमवती एकदम असहाय हो चुकी है। वह हर समय दरवाजे पर बैठी आंशू बहाती रहती है। उसकी मदद करने वाला कोई नहीं है।

सोमवती का मामला थाने से लेकर राष्ट्रपति भवन तक सबके संज्ञान में है। नरेश पारस ने सोमवती का मामला राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग को भी भेजा लेकिन बाल आयोग ने यह कहकर टाल दिया कि मामला पूर्व से ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में चल रहा है। इस लिए आयोग कोई भी कार्यवाही नही कर सकता है। मानवाधिकार आयोग ने भी यह कहकर फाईल बन्द कर दी कि पुलिस ने पैम्पलेट छपवाकर बांट, टीवी रेडियों के माध्यम से जानकारी प्रकाशित कराई है। पुलिस द्वारा कार्यवही जारी है इसलिए फाइल बन्द कर दी जाती है।

आगरा की महापौर श्रीमती अंजुला सिंह माहौर एक महिला हैं, उ0 प्र0 की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती हैं तथा देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पद पर भी एक महिला श्रीमती प्रतिभादेवी सिंह पाटिल विराजमान हैं। देश में सभी जगह महिला शासन होते हुए भी एक महिला अपने तीन बेटों को ढूढने के लिए दर-दर भटक रही है। क्या सभी की मानवीय संवेदनाएं मर चुकी हैं। 

देश में तमाम महिला एवं बाल अधिकार संगठन हैं फिर भी सोमवती पर किसी को भी तरस नहीं आया। यदि पुलिस शुरूआत में ही सोमवती के बेटों की गुमसुदगी दर्ज कर लेती तो शायद उसके बेटों को ढूढा जा सकता था लेकिन पुलिस ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया। सोमवती के बेटों को ढूढा जाए तथा उसकी आर्थिक मदद की जाए। उसके बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की जाए। सोमवती आज भी अपने बेटों का इंतजार कर रही है।---

आगरा से वरिष्ठ पत्रकार श्री ब्रज खंडेलवाल की रिपोर्ट

Saturday, July 16, 2011

देश के नेताओं अब तो तुम कायरता छोडो

वो भी नेता थे, जिन्होंने देश की खातिर
अपने पूरे जीवन को होम था कर डाला
एक ये भी नेता है, जिन्होंने कुर्सी की खातिर  
अफजल और कसाबों की बिरयानी खिला के है पाला

आज जब गाँधी, सुभाष, और तिलक
मंगल पांडे, राजगुरु, सुखदेव और भगत
स्वर्ग से इन नेताओं की करतूतों को देख कर
वो शर्मशार हों जाते होंगे,
पहले शहीद हुए थे वो
अब इन नपुंसको के कारण
वो लज्जा से मर जाते होंगे

उन्होंने जब दी थी जाने तो सोचा होगा
हम अपना एक अच्छा मुल्क बनाएंगे
सब के पेट में दाना होगा
सभी को जीने का अधिकार दिलाएंगे

पर लगता है अब तो जैसे सिर्फ
नेताओं और गुंडों को जीने का अधिकार है
आम जनता मरती है तो मर जाये
वैसे भी गरीबों का होना नेताओं के लिए बेकार है
जब तक आते नहीं है चुनाव
इन नेताओं को जनता से
भला कौन सा सारोकार है

जब इन नेताओं से पूंछो
क्यूँ अफ्जल कसाब जैसे आतंकी
अब तक फांसी से दूर बैठे हैं
क्यूँ ये नेता इन दुश्मनों को
जेल में बंद कर के चैन से लेटे हैं

तो इन नेताओं का कहना है
हम क़ानून के रक्षक है
हम भक्षक कैसे बन जाएँ
बिना सुनवाई के इन सब को
हम फांसी पर कैसे चढ़वाएं

मै पूंछता हूँ
अफजल की दया याचिका
ख़ारिज होने पर भी
क्यूँ ग्रह मन्त्रालय में
वो रिपोर्ट ढाई साल धुल खाती है
क्यूँ कसाब को फांसी देने में
निचली अदालत भी
दो साल का लम्बा समय लगाती है
क्यूँ कसाब की सजा हेतु
उच्चतम न्यायलय में जल्दी नहीं की जाती है


मुझे तो इस देरी में
सरकार और नेताओं की ही
चाल नजर आती है
दाल में कुछ काल नहीं
मुझे तो पूरी ही काली
दाल नजर आती है

एक अतंकवादी के जन्मदिन पर
कुछ धमाके हों जाते हैं
और हमारे देश के कर्ण धार
जांच के पानी से अपना मुह धो कर
अपने घर में जा कर सो जाते है

जांच के पानी से मुह धो लेने वाले
ये जो किस्मत के है हेठे
जाने कब समझेंगे किसी विस्फोट मे
मर सकते हैं इनके भी बेटे


ये कुछ नामर्द हमारे देश में आकर  
हमारे बच्चों की जाने ले जाते हैं
और हमारे कायर नेता
रोष दिखा कर चुप हों जाते हैं

जो देश के वीर जवान
आतंकियों को पकड़ कर
जेलों में बंद कराते हैं
तो ये नेता उनको सजा दिलवाने के बदले
जेलों में करोडो खर्च कर के
बिरयानी खिलाते है

देश के नेताओं
अब तो तुम कायरता छोडो
सीखो कुछ अपने पुरखों से
इन आतंकियों की गर्दन तोडो

और जो तुम अब भी नही जागे
तो मजबूरन हम जग जायेंगे
और फिर तुम जैसे कायर
इस देश से पक्के से मिट जायेंगे

अम्बिकाप्रसाद दुबे'कुंदन'/श्रवण शुक्ल 
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