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Sunday, February 2, 2014

तुम्हारा प्यार

श्रवण शुक्ल
(दिल का मरीज)
तुम्हारा प्यार ही तो है, जीने की वजह
तुम्हारा प्यार ही तो है, लंबे इंतजार की वजह

तुम्हारा प्यार ही तो है, जो उम्मीदें देता है
जो प्यार जगाए हुए है औरों के लिए भी
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिनसे उम्मीदें थी
जिसके लिए हूं मैं, तुमसे दूर होकर भी

तुम्हारा प्यार ही तो है, मेरे समर्पण की वजह
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो जिंदा रखे हुए है सबकुछ
वर्ना जीने को था ही क्या ?
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो जा रहा है 
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो मेरा था, लेकिन किसी और की किस्मत में लिख गया
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिसके लिए अब भी जिंदा रहूंगा
...जैसे अबतक था
तुम्हारा प्यार ही तो है, जिसके लिए आउंगा..
अगले जन्म भी
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो शायद अब भी मिले
आखिरी बार ही सही
तुम्हारा प्यार ही तो है, जो सुल्तानपुर से शुरु..
और जाने कहां रुकेगा .. कारवां
शायद कभी नहीं
क्योंकि...कहने वालों ने कहा है..
लिखने वालों ने लिखा है..
प्यार कभी खत्म नहीं होता...
तो उम्मीदें भी खत्म नहीं होंगी...
क्योंकि जिंदगी में जो चाहिए..
वो है मेरे पास..
पूछो क्या... 
तुम्हारा प्यार।

तुम्हारा प्यार (C) copyright श्रवण शुक्ल



Wednesday, January 29, 2014

गांधी और पश्चाताप...



गाँधी जी ने सत्य के साथ कई अनुप्रयोग किये । उनमें से कई प्रयोग विवादास्पद रहे तो कई प्रयोग असफल भी रहे । आजादी पर मनाये जा रहे जश्न में यह सूत्रधार ना जाने किन कारणों से एक अंधेरे गुमनाम स्थान पर शायद पश्चाताप कर रहा था । आजादी के बाद ऐसी क्या पीड़ा रही होगी कि देश के नाम संदेश देने के बजाय उन्होने कहा कि “नहीं चाहिए ऐसी आजादी” । 
संजय महापात्र


शायद वे आजादी के लिए निर्मित उस संगठन के नाम से भविष्य में होने वाले दुरूपयोग को भाँप कर उसे समूल नष्ट कर देना चाहते थे जिस संगठन की विरासत पर अपना दावा ठोक कर लोग 65 सालों से सत्ता पर काबिज हैं । अपने उद्देश्यों में सफल हो जाने के बाद इस संगठन को औचित्यहीन घोषित कर नष्ट कर देने की गाँधी की इस अंतिम इच्छा की भ्रूण हत्या उन लोगों के द्वारा की गई जो अपनी महत्वाकाँक्षाओं की पूर्ति हेतु अब इस संगठन के सहारे रोज गाँधी की आत्मा का वध कर अपनी गाड़ी खींचे जा रहें । ये तो अच्छा हुआ कि इनके कुकर्मों को छुपाने के लिए नाथूराम ने गाँधी के शरीर का वध कर एक मजबूत किला बना दिया वरना गाँधी अपनी दुर्दशा देखकर खुद ही शर्म से आत्महत्या कर लेते।

खैर उनका ये सिलसिला अनवरत जारी है लेकिन इस बीच एक अन्य रिटायर्ड फौजी को गाँधी का अवतार घोषित कर रामलीला मैदान में गाँधी के उसी पुराने आन्दोलनों और अनशन के हथियारों का इस्तेमाल कर आम आदमी पार्टी के नाम पर कुछ लोग सत्ता तक पहुंचने में ऐनकेन प्रकारेण सफल हो गये । अब वही लोग अनशन कर रहे शिक्षकों को बर्खास्त करने की धमकी दे रही है।

कल आम आदमी की इस तथाकथित जनताना सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने सचिवालय के सामने आमरण अनशन पर बैठे शिक्षकों से कहा कि अनशन खत्म करें नहीं तो नौकरी भी जाएगी। अनशन कर रहे शिक्षक आम आदमी पार्टी की इस भाषा से हैरान हैं। अनशन पर बैठे एक शिक्षक सुरेश कुमार मिश्रा की हालत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। अनशन कर रहे शिक्षकों ने ऐलान किया है कि हम मर जाएंगे, लेकिन सरकार के अन्याय को सहन नहीं करेंगे। शिक्षकों की इस धमकी को अनशन कर ऐसी ही धमकी देने के चारित्रिक विशेषता वाले शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कड़ी निंदा कर कहा है कि अगर शिक्षक अनशन खत्म कर स्कूलों में नहीं लौटे तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा।

इस देश में आजादी के बाद भी निरंतर सत्य के साथ अनुप्रयोग अनवरत जारी हैं और सुराज की आस लिए सुखद भविष्य की बाट जोहते आम भारतीय की आँखे भावशून्य होकर पथरा गई हैं ।

गाँधी तुम जहाँ कहीं भी होगे अपने देश की दुर्दशा देखकर कम से कम नाथूराम को तो धन्यवाद दे ही रहे होगे कि उसने तुम्हे ऐसे दिन देखने की पीड़ा से मुक्ति दिलाई और यदि वास्तव में ऐसा ही है तो इसके लिए मुझे भी धन्यवाद दो कि मैनें तुम्हारी पीड़ा समझी और ये लिखने की जहमत उठाई वरना अभी इस पोस्ट पर तुम्हारे नाम की टोपी लगाये कई लोग आयेंगे और लानत मलामत कर अपने को सेकुलर साबित करने का असफल प्रयास करेंगे ।

लेकिन ये सब देखकर तुम कभी भूल कर भी इधर अवतार लेने की कोशिश मत करना वरना ये लोग तुम्हे भी ये कह कर साम्प्रदायिक घोषित कर देंगे कि ये आदमी “रघुपति राघव राजा राम” गाता है । इन लोगों ने अपने लिए दूसरा गाँधी बना लिया है जिसके साथ ये मीलों आ गये हैं और कह रहें हैं के अभी मीलों और आगे जाना है ।

इसलिए बापू मेरी सलाह है , अपनी पुण्यतिथि पर जश्न मनाईये ... बाकी जो है सो तो हैईये ही ...
..................फेसबुक से साभार

Tuesday, January 28, 2014

क्या लिखूं ??





ज़िक्र भी करदूं ‘मोदी’ का तो खाता हूँ गालियां
अब आप ही बता दो.. मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं ??
कोयले की खान लिखूं या मनमोहन बेईमान लिखूं ?
पप्पू पर जोक लिखूं या मुल्ला मुलायम लिखूं ?
सी.बी.आई. बदनाम लिखूं या जस्टिस गांगुली महान लिखूं ?
शीला की विदाई लिखूं या लालू की रिहाई लिखूं
‘आप’ की रामलीला लिखूं या कांग्रेस का प्यार लिखूं
भ्रष्टतम् सरकार लिखूँ या प्रशासन बेकार लिखू ?
महँगाई की मार लिखूं या गरीबो का बुरा हाल लिखू ?
भूखा इन्सान लिखूं या बिकता ईमान लिखूं ?
आत्महत्या करता किसान लिखूँ या शीश कटे जवान लिखूं ?
विधवा का विलाप लिखूँ , या अबला का चीत्कार लिखू ?
दिग्गी का 'टंच माल' लिखूं या करप्शन विकराल लिखूँ ?
अजन्मी बिटिया मारी जाती लिखू, या सयानी बिटिया ताड़ी जाती लिखू?
दहेज हत्या, शोषण, बलात्कार लिखू या टूटे हुए मंदिरों का हाल लिखूँ ?
गद्दारों के हाथों में तलवार लिखूं या हो रहा भारत निर्माण लिखूँ ?
जाति और सूबों में बंटा देश लिखूं या बीस दलो की लंगड़ी सरकार लिखूँ ?
नेताओं का महंगा आहार लिखूं... या कुछ और लिखूं....
अब आप ही बता दो.. मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं ??..अनाम

Friday, January 24, 2014

Heartless....

श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
(नाम में रावण पसंद है मुझे। जिससे लोग नफरत करते हैं)

दुनिया का सबसे बुरा इंसान हूं मैं...हां..खलनायक पसंद हैं मुझे.. हूं मैं बुरा आदमी.. हूं मैं हर्टलेस.. कोई और आरोप ? नहीं न ? ऐसा ही हूं मैं.....

आदत सी पड़ जानी है इसकी.. सबको..हां..मुझे भी आदत है। पसंद है मुझे मेरी ये जिंदगी। मान लिया.. हूं मैं हर्टलेस...

सच्ची कहता हूं, मैं एक गवार हूं..वो भी जाहिल वाला .....समझ कुछ नहीं आता.. बस.. यूं ही सच बोलना सीख लिया.. अपनी मां से.. आशिर्वाद है सिर्फ मां का। किसी और का चाहिए भी नहीं।

हां मां ने खलनायकी नहीं सिखाई..ये तो दुनिया से सीखा.। मां की नजर में आज भी वही लविंग बॉय हूं। प्यारा सा बच्चा...

और क्या कहूं... किसी से नफरत करने के लिए एक वजह काफी है... मैंने तो काफी सारे बता दिए.... नफरत करो सभी मुझसे... कोई फर्क नहीं पड़ता..

बस मां का प्यार चाहिए... दुनिया का प्यार दिखावटी है। मुझे नहीं पता कि मैं क्यों लिख रहा हूं.. शायद गुस्सा है किसी बात का... हां.। याद आया.. गुस्सा है खुदसे। लेकिन पता ही नहीं कि क्यों। एक वजह हो तो बताऊं..शायद ऐसा ही हूं मैं. एक बुरा इंसान। जो प्यार का नहीं..नफरतों का भूखा है। जिसे अपने इमेज की भी परवाह नहीं.. क्यों परवाह हो ? जब किसी से नफरत का कोई डर ही न हो।

Sunday, January 12, 2014

नाराज नहीं किसी से






श्रवण शुक्ल

दर्द में भी मुस्कराए, लेकिन कोई समझ न पाए.. 
सारे गमों को छिपाए, लेकिन कुछ न सुनाए..
हर शाम जिए, बिना उफ किए..
चलती ही जाए, सबकुछ भुलाए..

हर दिन निकले, बिना कुछ कहे..
कुछ शायरी, कुछ नगमा गुन-गुनाए..
हालातों की कुछ शिकायत भी नहीं..
बस मुस्कराए, खामोशी से चलती जाए..

जो खुशियां मिली, उन्हें खुद में समेटती जाए..
खामोश सफर में अकेली, मगर नाराज नहीं किसी से
मेरी जिंदगी...
ऐ जिंदगी...ऐ जिंदगी... ऐ जिंदगी....
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